पुनः स्मरण/15/4/2020
(समय का सदप्रयोग/व्यर्थं प्रयोग)
जय सेवा जय मंडल जय भारत
श्रीमान
सादर प्रणाम
आप अपने परिवार के साथ "कोरोना वायरल" द्वारा प्रभावी जानलेवा बीमारी से घर में रह कर सुरक्षित रहे। आपका जीवन अनमोल है उस को संरक्षित रखना हम सबका प्रथम दायुक्त है।

भारत सरकार द्वारा लोकहित में पुनः 19दिन का भारत बंदी का आदेश सामान्य नहीं है।
हमे हमेशा सकारात्मक सोचना चाहिये तभी आप अपने जीवन को सार्थक बना सकते हो।
मेरी अपनी सोच है मैं इस सोच को किसी के ऊपर थोप नहीं रहा हूँ।सरकार को जब अपने वैज्ञानिक साधनों से मानव जीवन बचता नहीं दिखता तब सरकारे जीवन बचाने का अंतिम निर्णय भारत बंदी (सामाजिक दूरी)ही उसके पास अंतिम उपाय है।
जिसे हम सबको सहर्ष स्वीकार करना चाहिए,यह जीवन हित में है।
मैं इससे आगे एक विचार रखता हूँ,आज देश में जीवन जीना इतना सामान्य भी नहीं है तमाम प्राकृतिक आपदा तथा मानव जनित प्रदूषण वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, जैविक प्रदूषण, कचरे के ढेर, यातायात,यात्रा का प्रेषर मानसिक प्रदूषण में बदल गया है इससे "कोरोना" जैसी तमाम घातक बीमारियां पूरी दुनिया में फैली है यह सब मानव जनित व्यवस्था के कारण है इनका सबका इलाज सरकारों के प्रयास के बावजूद संभव नहीं हो सका।कोरोना जैसी अदृश्य बीमारी नहीं होती तो किसी भी सरकार की कोई ताकत भारत बंदी नहीं करा सकती ।यह सोचनीय विषय है कि दुनिया के शक्तिशाली देश एवम शासक जो नहीं कर सकें।वह कार्य अदृश्य "कोरोना वायरल" ने कर दिखाया।40दिन की बंदी से "कोरोना" से बचने के साथ साथ अन्य प्रदूषणों में कमी आयेगी जिससे जिंदगी जीना आसान होगा।
यह बर्तमान में जीवित मानव के जीवन मे एक अतिमहत्वपूर्ण समय है जो कल इतिहास होगा आप सभी ऐतिहासिक घटना के गवाह होंगे, भले ही लोग जीवित रहने के डर से घर में बंद हो।
इसको हम सब को अपने अपने मे जीवन में सकारात्मक विचार के साथ महत्त्वपूर्ण स्थान देना चाहिए।हम सब जीवन भागव भाग जिंदगी में परिवार, आत्मचिंतन, सामाजिक चिंतन, प्राकृतिक चिंतन के लिएसमय नहीं निकाल पाते हैं।
ऐसी स्थिति में इन 40दिनों में आत्मचिंतन,पारिवारिकचिंतन।सामाजिक चिंतन,प्राकृतिक चिंतन, देश दुनिया में घट रही प्राकृतिक आपदा पर चिंतन करें, तो हम सब मिलकर अपने जीवन में मानवीय विकृति को समूल नष्ट कर,मानवीय मूल्यों की स्थापना कर , अपने अपने जीवन को बदल कर,21वीं शदी को स्वर्णिम युग परिवर्तित कर सकते हैं।

20दिन एकांत में परिवार के साथ जीवन की कम से कम सुविधाओं के साथ जीवन यापन कर प्रत्येक परिवार को मन कर्म वचन से प्रतिदिन संकल्प करें ,कि मुझे मानवीय विकृति त्याग कर अपने जीवन मे मानवता के लिए कृति संकल्पित होना है, उसको नित्य दिन अपने जीवन में धारण करें तो 40दिन में उसके व्यवहार एवम विचार में सकारात्मक एक स्थायी परिवर्तन आयेगा,जिसमें वह प्रण करें वह आज से मानवतावादी धारणा को धारण करता हूँ, तथा कभी भी किसी भी परिस्थिति में मानवता के खिलाफ कोई भी कार्य नहीं करूंगा।
तब यह40दिन आपके जीवन को उत्कृष्ट बनाने में सक्षम होंगे।
"सेवा" के लोगों से विशेष अनुरोध करूँगा कि यह40दिन का समय आपके द्वारा लिये गये "सेवा" के व्रत को उत्कृष्टता की पराकाष्ठा तक ले जा सकता है।जो व्यक्ति अपने जीवन मे मानवतावादी धारणा को धारण करता है वही व्यक्ति/विचार/संस्था मानवता के खिलाफ हो रहे अन्याय को सकारात्मक दृढ़ता से मुकाबला कर सकता।
।।हम सुधरेंगे जग सुधरेगा।।
।।समय मूल्यवान है इसे व्यर्थ में न गुजारे।।
।।ये40दिन अतिमहत्वपूर्ण है व्यर्थ में न गुज़ारे।।
नियमित रूप सकारात्मक विचार
सामाजिक, प्राकृतिक चिंतन करें
एवम योग प्राणायाम कर अपने जीवन स्थायी परिवर्तन प्रक्रिया को अपनाएं।
अपने जीवन के साथ साथ विखंडित पिछड़े वर्ग की एकता के सूत्र-:"मंडलवादी" विचार/सिद्धान्त को स्थापित करने के लिए व्यक्तिगत रूप इस "अवधारणा" को स्थायी रूप से "धारण" कर इस पिछड़े/बंचित समाज को न्याय प्राप्ति संभव है
तय आपको करना है कि समय का सदप्रयोग या समय का व्यर्थ प्रयोग।
धन्यवाद
जय सेवा जय मंडल
डॉ एम आर यादव रा अध्यक्ष सेवा

==============================================================================================================================================

जय मंडल जय सेवा जय भारत।
05/05/2020

विषय:-"सेवा"की मुख्य उपलब्धियां।

सेवा के सम्मानित
साथियों
आप अवगत है "सेवा"देश मे ओबीसी हित के लिए एक जाना पहचाना ब्रांड बन गया है, जागरूक ओबीसी वर्ग, ओबीसी हित से जोड़कर देखता है,इसका प्रमाण उपरोक्त वाक्य से समझा जा सकता है, जब कोई देश/प्रदेश की सरकार/व्यवस्था ओबीसी के खिलाफ कार्य करती है, तो ओबीसी के लोग कहते सुने होंगे, कि "सेवा" या "सेवा के लोग" क्या कर रहे है?
यह "सेवा"के दायित्व वाहक एवम "सेवा" से जुड़े लोगों के लिए गर्व एवम कितनी जिम्मेदारी भरा वाक्य है, इसको समझना अतिआवश्यक है।
यह वाक्य "सेवा"/आप सभी का ओबीसी के प्रति समर्पित संयुक्त प्रयास का प्रतिफल है।

जब2008/2009में "सेवा" के रूप में संगठित प्रयास शुरू किया था, उस समय हम सब के पास ओबीसी को सामाजिक एवम वैचारिक रूप से संगठित होने जैसे विचार देंने के सिवाय कुछ नहीं था, लेकिन निरन्तर सयुक्त प्रयास करने से "सेवा" ओबीसी का "मंडलवादी विचार स्थापित" करने की "अमूल्य धरोहर" बनकर उभरी है।

लेकिन आज"सेवा" द्वारा ओबीसी के पक्ष में किए गए तमाम प्रयास सफल हुए वह निम्नलिखित है।

सेवा की मुख्य उपलब्धियां:-

1-देश में पिछड़े वर्ग को सामाजिक एवम वैचारिक रूप से संगठित करने ,ओबीसी(मंडलवादी)विचारधारा को स्थापित करने तथा पिछड़े वर्ग के विद्वानों को स्वतंत्र रूप से अपने विचार रखने हेतु (राष्ट्रीय/प्रान्तीय/मंडल/जनपद/नगर/ब्लॉक/न्याय/सेक्टर इकाइयों के हजारों दायित्व वाहक एवम लाखों सहयोगी सहित) एक बड़ा गैरराजनैतिक प्लेटफार्म /संगठन/मिशन ओबीसी प्रदान किया।

2-देश की बहुसंख्यक आबादी एवम मंडलवादी विचार की"अवधारणा" के प्रतीक परम् श्रधेय बी पी मंडल साहव के साथ साथ पिछड़े वर्ग के महापुरुषों के विचार/पुरुषार्थ को ओबीसी के जनमानस तक पहुँचाने के लिये उनके लाखों बैठकों, मैग्जीन,चित्रों,सेमिनारों,जन्मदिवस समारोह/परिनिर्वाण दिवस समारोह आदि कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक/वैचारिक चिंतन का प्रसार स्थापित किया।

3-देश/प्रदेशों में "सामान्य शब्द" की अवधारणा सिर्फ सवर्ण जातियों के लिए जानी,जाती थी,आरक्षितश्रेणी/समाज में सामान्य शब्द का अभिप्राय सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित शब्द था,"सेवा" के प्रयास से शासन/प्रशासन/नोकरियों आदि में प्रयोग होने वाले "सामान्य शब्द" के स्थान पर "अनारक्षित शब्द"का प्रयोग होने का शासनादेश जारी कराया गया।

4-राष्ट्रीय/प्रान्तीय भर्तियों में/(उ प्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा भर्तियों तथा प्रशासन द्वारा2015में लेखपालों भर्ती/2011की सिपाही की भर्ती जो2015में भर्ती की गई) उसमे सही आरक्षण नीति लागू करने का प्रयास सफल रहा।

5-2015के ias के रिजल्ट घोषित होने के साथ123ओबीसी के प्रतियोगियों की सफल होने के बाद भी, क्रीमीलेयर के आधार पर नियुक्ति में रोक लगाई गई(जबकि वित्तीय/बैंक संस्थान/पब्लिक सेक्टर यूनिट के अधिकारी क्रीमीलेयर के दायरे में नहीं आते थे) निम्नलिखित प्रतियोगी भी इन्हीं सस्थानों से सम्बंधित थे ,उसके बाद भी इन्हें नियुक्ति रोका गया था,"सेवा" के संसदीय प्रयास असफल होने के बाद ,"सेवा"इन 123ओबीसी iasअधिकारियों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, "सेवा" का प्रयास सफल हुआ।

6-देश मे सामाजिक/राजनैतिक साजिश के तहत ओबीसी की पांच उपजातियों को (यादव, कुर्मी, कोइरी/सैनी, गुजर, लोध)ओबीसी से निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट की याचिका को 30जून2016 को "सेवा" द्वारा खारिज कराया।

7-देश मे फिर सामाजिक /राजनैतिक सडयंत्र के तहत ओबीसी को विखंडित करने मकसद से 2017 "पिछड़ा वर्ग वर्गीकरण आयोग" का गठन किया गया, जिसकी कार्यवाही को "सेवा" द्वारा न्यायिक काउंटर के माध्यम से निष्प्रभावी कर ओबीसी को विखंडन की कार्यवाही से रोका।

8-देश मे बहुसंख्यक आबादी ओबीसी के सामाजिक, संवैधानिक, सैद्धांतिक संरक्षण हेतु "राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग" (27वर्षों सेअधिकार विहीन था)"सेवा"के निरंतर प्रयास से 2018में संवैधानिक/न्यायिक अधिकार प्राप्त "आयोग" बना।

9-पुनःउत्तर प्रदेश में ओबीसी की उपजाति "यादव" को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ओबीसी से बाहर निकालने की प्रक्रिया में "सेवा" द्वारा 12जुलाई2019को न्यायिक काउंटर प्रस्तुत कर याचिका खारिज कराई।

10-देश सबसे बड़ी घटनाओं में "एक" जनवरी2019में असंवैधानिक रूप संविधान में परिवर्तन कर 10%सवर्ण आरक्षण लागू किया गया, जिसको चैलेंज करते हुए, उसके खिलाफ "सेवा" ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसका निर्णय13अगस्त2019से रिजर्व है ,निर्णय "सेवा" के पक्ष में आने की प्रबल संभावना है।

11-देश मे ओबीसी आरक्षण लागू हुआ ,तो शिक्षा में आरक्षण प्रथम चरण में लागू किये जाने का प्रचार प्रसार बहुत हुआ, लेकिन देश में
निजी क्षेत्र की शिक्षा (पब्लिक स्कूल) के अनुरूप, भारत सरकार के अंतर्गत उच्चकोटि की शिक्षा के लिए चर्चित केंद्रीय विद्यालय एवम नवोदय विद्यालय, ओबीसी आरक्षण लागू होने से पूर्व से देश में संचालित थे,उनमे वर्ष 2019 तक ओबीसी छात्रों के लिए प्रवेश में आरक्षण प्राप्त नहीं था ,सिर्फ sc st के आरक्षण तथा शेष सवर्ण छात्रों होते थे, कुछ प्रवेश मा सांसदों की सिफारिश से होते थे, वह भी सिफारिशें सवर्ण छात्रों के पक्ष में होती थी, देश में निम्नलिखित विद्यालयों में लगभग12लाख छात्र अध्ययनरत होते है "सेवा" के अथक प्रयासों से दिसंबर2019में भारत सरकार द्वारा उक्त विद्यालयों में ओबीसी छात्रों को भी वर्ष2020से 27%आरक्षण देने का निर्णय किया।देश में लगभग 12लाख छात्र संख्या के अनुसार27%ओबीसी छात्रों को प्रवेश में लाभ मिल सकेगा।
"सेवा"के विचार के अनुसार शिक्षा एवम संख्या के लिहाज से ओबीसी आरक्षण की सबसे बड़ी उपलब्धी है,पिछड़े वर्ग के छात्रों को प्राप्त होगी,यह "सेवा" के "मंडलवादी" विचार की सबसे बड़ी उपलब्धी मानी जायेगी।
12-उत्तर प्रदेश में ओबीसी के छात्रों को ias/pcs परीक्षाओं हेतु विशिष्ट कोचिंग हेतु समाजकल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित सेंटर/वित्तीय सहायता के लिए पिछड़ा वर्गआरक्षण अधिनियम के अनुसार ओबीसी को 27%आरक्षण 04/05/2020 जारी कराया।

13-भारत सरकार द्वारा "सेवा" को जनवरी2020के पत्र के अनुसार देश में मेडिकल शिक्षा में नीट के माध्यम से15%केंद्रीय सीटों के आवंटन तथा उच्च शिक्षा में पूर्ण प्रतिनिधित्व की दिशा में ओबीसी को27%आरक्षण मिलने के लिए जल्दी आदेश होने की प्रबल संभावना का है ।

14-"सेवा" के माध्यम से देश/प्रदेशों में आपसी संवाद से ओबीसी के पक्ष में हजारों लोगों को सहयोग प्रदान किया जाना ,मंडलवादी विचार की स्थापना में अपने आप मे अदभुत शक्ति का सृजन होने का अनुभव प्रतीत होता है, यही अदभुत शक्ति ओबीसी को जाति ,समाज, धर्म,क्षेत्र के नाम हो रहे अन्याय को निष्प्राण तथा ओबीसी को संगठित करने की महाशक्ति प्राप्त होगी,तथा "मंडलवादी अवधारणा" को स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होंगी।

15-"सेवा"ओबीसी के पक्ष में भारत सरकार/प्रदेश सरकारों एवम विभिन्न माध्यमों से ओबीसी के साथ हो रहे अन्याय पूर्ण कृत्य के खिलाफ एवम आपके संवैधानिकअधिकारों के पक्ष में निरन्तर प्रयासरत है।

आप सभी से विन्रमता पूर्वक अनुरोध है कि निम्नलिखित उपलब्धियों को "सेवा" के समस्त साथियों /परिवार/रिस्तेदारों/ओबीसी के साथियों तक पहुँचाने का प्रयास जारी रखे ।धन्यवाद
जय मंडल जय सेवा
डॉ एम आर यादव रा अध्यक्ष सेवा

==========================================================================================================================================

 

     

    जय मंडल जय सेवा जय भारत।
    011/05/2020
    सेवा के सभी सम्मानित साथियों

    ।स्मरण/धारण करने हेतु विचार।
    ---–----–-----------/-------------
    व्यक्ति/व्यक्तियो के विचार से एक मिशन का जन्म होता है, मिशन के लिए कोई भी कार्य अंतिम नहीं, सकारात्मक, रचनात्मक कृत को निरन्तर जारी रखने से चरित्र निर्माण की(नैतिकमूल्य,निष्ठा,ईमानदारी,
    निष्पक्ष,निःस्वार्थ भावना ,समझ, दृढ़विश्वास,साहस, वफादारी, सभी का सम्मान आदि से मिलकर विकसित व्यक्तित्व से)प्रक्रिया पूर्ण होती है।
    चरित्रवान होने के साथ चरित्रवान दिखना भी होगा।

    हम सब को अपने चरित्र में दृढ़ संकल्प के साथ ओबीसी (क्षेत्र, धर्म,समाज,जाति ,उपजाति,गोत्र,
    परिवार,भाई, भतीजावाद विहीन ) के साथ बिना किसी भेदभाव के "सेवा" की धारणा(विचार) के अनुरूप हर तरह से सहयोग/योगदान प्रदान करने का चरित्र एवम विचार हर हालत में विकसित कर दृढ़ संकल्पित होना होगा ।
    तभी सैकड़ो वर्षों में साजिश के तहत ओबीसी के विखंडन की प्रक्रिया को खंडित कर पाओगे।
    नहीं तो आप सभी का उत्कृष्ट कृत ("सेवा" का निर्माण/सेवा परिधि में दिया गया सहयोग/आर्थिक/सामाजिक/शैक्षिक/ संवैधानिक योगदान)निष्फलता को प्राप्त होगा।
    आप सेवा/मंडलवादी समाज/विचारधारा की स्थापना ही पिछड़े वर्ग को सामाजिक/शैक्षिक/संवैधानिक/राजनैतिक न्याय दिलाने में सक्षम होंगे।
    धन्यवाद।
    जय मंडल जय सेवा
    डॉ एम आर यादव रा अध्यक्ष सेवा

    =======================================================================================================================================

     

    जय मंडल जय सेवा जय भारत।
    22/05/2020
    अतिमहत्वपूर्ण/अवश्य पढ़ें एवम आत्मचिंतन करें।

    सेवा के सभी सम्मानित साथियों

    विषय:-वर्गवादी सामाजिक एवम वैचारिक, अवधारणा का स्वरूप:-
    (मनुवाद(सवर्णवाद)
    अम्बेडकरवाद(दलितवाद)
    मंडलवाद (पिछड़ा वर्गवाद)

    यह मेरा निजी राय/व्यक्तिगत अनुभव से लिख रहा हूँ किसी व्यक्ति/समाज/वर्ग/संगठन/दल की भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा मकसद नहीं ,अगर किसी को मेरे विचार से असहमति हो तो मैं उनका क्षमा प्रार्थी हूँ।
    लेकिन अगर इस विचार से सहमत है तो ओबीसी समाज तक पहुँचाने का प्रयास जारी रखें जिससे पिछड़े वर्ग के हित में मंडलवाद स्थापित किये जाने की प्रक्रिया में सहायक सिद्ध हो सकें।

    ---–----–-----------/-------------
    मैं कोई इतिहासकार नही हूँ लेकिन समय के साथ आप सभी से सीखने का प्रयास करते हुए अपने अनुभव प्रेषित कर रहा हूँ।
    दुनिया में मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ मानवीय विकृतियों का जन्म भी हुआ तथा मनाव विचार शीलता का भी सृजन हुआ,विचारशीलता के द्वारा सकारात्मक/नकारात्मक दोनों ही शक्तियों ने मानवीय प्रवृत्ति में स्थाई रूप धारण कर लिया।
    मानवीय सामाजिक व्यवस्था की स्थापना के साथ साथ बंश परम्परा,राज्य परम्परा, एक दूसरे पर आधिपत्य की परम्परा ने स्थाई स्वरूप ले लिया, राज्य परम्परा ने
    शासक एवम शासित की व्यवस्था के तहत "देव एवम दानव" परम्परा को आगे बढ़ाया ,इस व्यवस्था/परम्पराओं में कोई व्यक्ति विशेष का महत्व नहीं।इतिहास के समयचक्र में सामाजिक सहयोग से तमाम "नायक" स्थापित हुए, उनके ही नाम से विचारवाद स्थापित हुए।

    सर्वश्रेष्ठ समाजवादी महानायक योगेश्वर श्रीकृष्ण ने नकारात्मक विचार को बदलने( देव एवम दानव को एक समान मनाने)मानवीय समानता एवम धर्म/सामाजिक न्याय की अवधारणा को स्थापित करने के लिए तमाम(देवताओं के नायक इंद्र को पराजित कर इस परम्परा का प्रतिकार किया) तथा पांडवों को सिर्फ पांच गांव मांगे वो भी न देने पर,अधिकार/ न्याय के लिए महाभारत जैसे युद्ध/ संघर्ष किये उन संघर्षों में वह अकेले नहीं थे, लेकिन उस व्यवस्था(विचार) को गीता जैसे
    मूलग्रंथ की रचना करने में युगपुरुष स्थापित हुए।( इस ग्रंथ में वाद में मनुवादियों ने कुछ अंश बदलकर अपने अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है)दुनिया मे यह विचार/गीता मानवतावादी (समता, ज्ञान,कर्म प्रधान)अवधारणा की उच्च कोटि की व्यवस्था कायम करने में सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ सिद्ध हुआहै।

    समय अंतराल के बाद देश में तमाम समाज सुधारक नायकों ने अपने सहयोगियों के योगदान से मानवतावादी विचारो के प्रभाव को साम्प्रदाय/धार्मिक शैली की स्थापना में भी तमाम धार्मिक ग्रंथों (कुछ मनुवादी धार्मिक ग्रंथों को छोड़ कर)की रचना मानवता के अनुकूल की गयी है।उनके नायक स्पष्ट है।

    देश/समाज की संचालन व्यवस्था के नाम पर बडी कुटिलता से समाज को जातियों एवम वर्ण में बाटना, भी एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा थी ,देव एवम दानव की व्यवस्था का सुधरा हुआ रूप है ,जो समाज को ऊँच नीच पर आधारित हजारों जातियों में विभाजित कर वर्णीय(ब्राह्मण, क्षत्री, वैश्य, शुद्र,अवर्ण) व्यवस्था स्थापित की गयी, सभी के जातीय एवम वर्ण के आधार पर कार्य/अधिकार/न्याय/सम्मान सुनिश्चित करने के लिए, लिखित संविधान/ग्रंथ "मनुस्मृति"की स्थापना की गई ,जिसमें बहुत सारे लोगों का योगदान रहा होगा, लेकिन "मनु" नाम के ब्राह्मण का योगदान मुख्य होने के कारण "मनुस्मृति" के नाम से "मनुवादी" विचारधारा को जाना जाता है।

    सवर्णों के हित संरक्षित हेतु लिखित संविधान "मनुस्मृति" के नाम से स्थापित हुआ।
    आज भी प्रत्येक सवर्ण बिना किसी कुतर्क/गतिरोध के अपने मन ,वचन,एवम कर्म में "मनुस्मृति" को स्थापित करने के लिये कृति संकल्पित है।
    आज देश की बहुसंख्यक आबादी उसी सवर्णवाद की पोषक "मनुवाद"की अमानवीयता व्यवस्था के शिकार से (पीड़ित)हैं/रही है।

    इसी "मनुवाद" के चलते हमारा देश हजारों वर्षों तक विदेशी शासकों के अधीन गुलाम रहा, इस मनुवाद ने उन सभी शासकों के साथ मिलकर मनुवादी व्यवस्था को कायम रखा है।जब मनुवाद का जहर विदेशी शासकों के गले उतरना बंद हुआ,तो देश में आजादी के नाम से बिगुल बजाया गया।
    इसी बिगुल के बीच देश में ऊँच नीच के शिकार,सामाजिक, शैक्षिक,संसाधनों से हीन तमाम पिछड़ी/दलित जातियों के महापुरुषों ने देश की बहुसंख्यक आबादी को समान शिक्षा, समान अधिकारों के पक्ष में तथा मनुवादी व्यवस्था के खिलाफ अपने अपने प्रयास जारी किए ,देश मे आजादी के करीब आते आते यह व्यवस्था/विचार, दलित/अम्बेडकरवाद में बदल गया ,इस आंदोलन में सैकड़ों वर्षों पूर्व से पिछड़े वर्ग के तामम समाज सुधारक/महापुरुषों के संघर्ष को दलितवाद के नायक के रूप में पहचान नहीं मिल सकी, देश जब आजाद हुआ तो , दलितों को आबादी के अनुसार देश के संसाधनों एवम संचालन में पूर्ण अधिकार के साथ संविधान में स्थान दिया गया, देश की सवर्णवादी व्यवस्था के नायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी, राष्ट्रपति मा राजेन्द्र प्रसाद जी, पूर्व प्रधान मंत्री मा जवाहर लाल नेहरू जी, गृहमंत्री मा सरदार वल्लभ भाई पटेल जीआदि (यह सभी राष्ट्रीय सत्ता के केन्द्र थे) का योगदान रहा, इन सभी की इच्छा के विपरीत sc ,st को भी समान अधिकार मिलना संभव नहीं थे,वहां भी ओबीसी के साथ विश्वासघात हुआ, वहां ओबीसी को संवैधानिक व्यवस्था में कोई न्याय/अधिकार प्राप्त नहीं हो सकें।
    sc st को मिले अधिकारों का पूरा श्येय डॉ भीमराव अंबेडकर साहव को मिला, इसके बाद देश में दलितों की विचारधारा का विस्तार
    "अम्बेडकरवाद" के रूप खूब फलफूल रहा है ।
    आज इस विचारधारा का विरोध करने की शक्ति किसी भी दल/सत्ता में नहीं है ,यही अम्बेडकरवादी विचारधारा का असली स्वरूपहै।
    अम्बेडकरवादियों / मनुवादियों ने "पिछड़े वर्ग" के महापुरुष /समाज सुधारक को खूब प्रयोग किया है ,लेकिन उन्हें नायक के रूप कभी स्वीकार नहीं किया,
    यह अम्बेडकरवाद/मनुवादियों की कटु सच्चाई है।

    आजादी के बाद वर्णीय व्यवस्था के स्थान को संविधान के दायरे में वर्गीय व्यवस्था ने ले लिया है। (सवर्ण, पिछडा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति) हम "सेवा"इस सच्चाई को जानते हुए भी सहमत हैं कि अगर किसी "वर्ग" विशेष को संगठित एवम संरक्षित रखना हो तो निर्विवाद रूप से उसी वर्ग के महापुरुष को नायक स्वीकार कर ही आगे की सामाजिक न्याय,
    सामाजिक परिवर्तन,विकास की कठिन यात्राओं को सफलता पूर्वक तय किया जा सकता है।

    अवसरवादी/किराये के नायक बहुत लम्बी यात्रा तय नहीं करा सकते हैं।
    आज ओबीसी के अनेकों महापुरुषों के विखंडित प्रयासो से राज्यों में40/50वर्षो एवम राष्ट्रीय स्तर पर30वर्ष पूर्व 3743 पिछड़े वर्ग उपजातियों को पिछड़ा वर्ग/पिछड़ी जाति को संवैधानिक मान्यता मिलने के बाद भी उसकी दुर्दशा के पीछे भी अवसरवादी/किराये के नायकों की राजनैतिक अवसरवादिता के कारण विखंडित/नेतृत्व विहीन वर्ग बन कर रह गया है। ओबीसी ने भिन्न भिन्न अवसरवादी नायकों को अपना नेतृत्व प्रदान किया है, निःसन्देश कुछ सवर्ण (मा राममनोहर लोहिया, मा जयप्रकाश नारायण, पूर्व प्रधानमंत्री मा वी पी सिंह आदि)नायकों ने ओबीसी के लिए न्याय की आवाज, ओबीसी के छोटे छोटे नायकों का सृजन,तथा ओबीसी आरक्षण की व्यवस्था को लागू करने की व्यवस्था मैं अहम भूमिका निभाई है।लेकिन यह सब के बाद भी यह सब ओबीसी के नायक बनने लायक नहीं, क्योंकि इनकी मूलधारणा में ओबीसी को लाभ पहुचाना था ही नहीं ,ओबीसी (देश की60%आबादी देश का सबसे बड़ा वोट बैंक है)पक्ष में किये गये कृति राजनैतिक मजबूरी/ राजनैतिक अवसरवादिता थीं ।

    "मा वी पी सिंह" जी का ओबीसी आरक्षण/मंडल कमीशन रिपोर्ट के कुछ अंश को लागू करने के प्रयास के लिए ओबीसी उनका हमेशा कृतिघ्य रहेगा।

    ओबीसी आरक्षण की बात होगी तो निश्चित ही पूर्व प्रधानमंत्री मा वी पी सिंह जी एवम मा शरद यादव जी, मा रामविलास पासवान जी अन्य सभी सहयोगी का नाम सम्मान के साथ हमेशा याद किया जायेगा।
    उसी क्रम पूर्व प्रधानमंत्री मा मनमोहन सिंह जी / मा अर्जुन सिंह जी जिन्होंने2006/2007 उच्च शिक्षा तथा प्रधानमंत्री मा नरेंद्र मोदी जी एवम उनके सहयोगियों का 2018में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देना तथा2020में केंद्रीय एवम नवोदय विद्यालयो में ओबीसी आरक्षण देने के लिए याद किया जायेगा।

    ओबीसी के पक्ष में आरक्षण की व्यवस्था होने के बाद भी ओबीसी को देश के संशाधनों/संचालन में पूर्ण प्रतिनिधित्व प्राप्त न होना कहीं न कहीं पूर्व में की गयी संवैधानिक व्यवस्था(सवर्णवादी) पर प्रश्नचिन्ह लगाता है?उसके पीछे सिर्फ एक ही कारण ओबीसी की कोई विचारधारा एवम प्रभावशाली नायक का न होना है।
    जब देश में संवैधानिक वर्गीय व्यवस्था के आधार पर विचारधाराओं के माध्यम से देश के संसाधनों/संचालन में भागीदारी/अवैद्य रूप कब्जेदारी जारी है,
    तो ऐसी स्थिति में पिछड़े वर्ग की विचारधारा सृजन अनिवार्य हो चला है।
    पिछले कुछ वर्षों से "सेवा" ने तय किया है ओबीसी "मंडलवाद" की विचारधारा से ही संगठित/संघर्ष शील/विकसित हो सकता है ,जिसके सिर्फ "बी पी मंडल" ही नायक है,उनके आप पास ओबीसी के / अन्य महापुरुषों की श्रृंखला रहेगीं ,उनको पूरा सम्मान दिया जायेगा।मंडलवाद के महानायक बी पी मंडल साहव ने पिछडों वर्ग के पक्ष में निष्पक्षता, भयमुक्त, दृढ़ संकल्प के साथ, बिना किसी राजनैतिक अवसरवादिता के जीवन के अंतिम समय तक देश की बहुसंख्यक आबादी(बिभिन्न साम्प्रदाय/पंथ/जाति/उपजाति विहीन3743उपजातियों को निष्पक्ष रूप से एक शब्द "पिछड़ी जाति"शीर्षक से मंडल कमीशन रिपोर्ट के रूप में महान ग्रंथ की स्थापना की है)तथा उसे लागू कराने का जीवन के अंतिम क्षण तक भरकस प्रयास किया जो हमेशा अनुकरणीय रहेगा।
    पिछड़ी जाति/पिछड़े वर्ग के लिए "मंडल कमीशन रिपोर्ट" "गीता रूपी ग्रंथ" के रूप में सर्वदा हम/"सेवा" का मार्गदर्शन करने की साक्षी होगी।

    पिछड़े वर्ग की "गीता" "मंडल कमीशन रिपोर्ट"के नायक "बी पी मंडल साहब" ही पिछड़े वर्ग की विचारधारा "मंडलवाद" के महानायक है।"मंडलवाद" में उनकी "समानता" किसी भी अन्य नायक से नहीं की जा सकती है।
    निःसन्देश "मंडलवाद" का ध्वजवाहक होने में "सेवा" ही अग्रणी भूमिका में है। "सेवा" अपने निष्पक्ष, दृढ़ संकल्प के साथ मन, वचन, कर्म की पूर्ण सामर्थ्य से ओबीसी की "मंडलवादी" विचारधारा को स्थापित करने में पूर्ण समर्पण के साथ समर्पित रहेगें।
    "सेवा" हमेशा पिछड़े वर्ग की "सेवार्थ धर्म" निभाने के लिए तत्पर रहेंगी।
    "मंडलवाद" की स्थापना से ही "पिछड़े वर्ग" का कल्याण सम्भव है।
    धन्यवाद
    जय मंडल जय सेवा
    डॉ एम आर यादव रा अध्यक्ष सेवा

    ===========================================================================================================================================

     

    जय मंडल जय सेवा जय भारत।
    05/05/2020

    विषय:-"सेवा"की मुख्य उपलब्धियां।

    सेवा के सम्मानित
    साथियों
    आप अवगत है "सेवा"देश मे ओबीसी हित के लिए एक जाना पहचाना ब्रांड बन गया है, जागरूक ओबीसी वर्ग, ओबीसी हित से जोड़कर देखता है,इसका प्रमाण उपरोक्त वाक्य से समझा जा सकता है, जब कोई देश/प्रदेश की सरकार/व्यवस्था ओबीसी के खिलाफ कार्य करती है, तो ओबीसी के लोग कहते सुने होंगे, कि "सेवा" या "सेवा के लोग" क्या कर रहे है?
    यह "सेवा"के दायित्व वाहक एवम "सेवा" से जुड़े लोगों के लिए गर्व एवम कितनी जिम्मेदारी भरा वाक्य है, इसको समझना अतिआवश्यक है।
    यह वाक्य "सेवा"/आप सभी का ओबीसी के प्रति समर्पित संयुक्त प्रयास का प्रतिफल है।

    जब2008/2009में "सेवा" के रूप में संगठित प्रयास शुरू किया था, उस समय हम सब के पास ओबीसी को सामाजिक एवम वैचारिक रूप से संगठित होने जैसे विचार देंने के सिवाय कुछ नहीं था, लेकिन निरन्तर सयुक्त प्रयास करने से "सेवा" ओबीसी का "मंडलवादी विचार स्थापित" करने की "अमूल्य धरोहर" बनकर उभरी है।

    लेकिन आज"सेवा" द्वारा ओबीसी के पक्ष में किए गए तमाम प्रयास सफल हुए वह निम्नलिखित है।

    सेवा की मुख्य उपलब्धियां:-

    1-देश में पिछड़े वर्ग को सामाजिक एवम वैचारिक रूप से संगठित करने ,ओबीसी(मंडलवादी)विचारधारा को स्थापित करने तथा पिछड़े वर्ग के विद्वानों को स्वतंत्र रूप से अपने विचार रखने हेतु (राष्ट्रीय/प्रान्तीय/मंडल/जनपद/नगर/ब्लॉक/न्याय/सेक्टर इकाइयों के हजारों दायित्व वाहक एवम लाखों सहयोगी सहित) एक बड़ा गैरराजनैतिक प्लेटफार्म /संगठन/मिशन ओबीसी प्रदान किया।

    2-देश की बहुसंख्यक आबादी एवम मंडलवादी विचार की"अवधारणा" के प्रतीक परम् श्रधेय बी पी मंडल साहव के साथ साथ पिछड़े वर्ग के महापुरुषों के विचार/पुरुषार्थ को ओबीसी के जनमानस तक पहुँचाने के लिये उनके लाखों बैठकों, मैग्जीन,चित्रों,सेमिनारों,जन्मदिवस समारोह/परिनिर्वाण दिवस समारोह आदि कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक/वैचारिक चिंतन का प्रसार स्थापित किया।

    3-देश/प्रदेशों में "सामान्य शब्द" की अवधारणा सिर्फ सवर्ण जातियों के लिए जानी,जाती थी,आरक्षितश्रेणी/समाज में सामान्य शब्द का अभिप्राय सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित शब्द था,"सेवा" के प्रयास से शासन/प्रशासन/नोकरियों आदि में प्रयोग होने वाले "सामान्य शब्द" के स्थान पर "अनारक्षित शब्द"का प्रयोग होने का शासनादेश जारी कराया गया।

    4-राष्ट्रीय/प्रान्तीय भर्तियों में/(उ प्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा भर्तियों तथा प्रशासन द्वारा2015में लेखपालों भर्ती/2011की सिपाही की भर्ती जो2015में भर्ती की गई) उसमे सही आरक्षण नीति लागू करने का प्रयास सफल रहा।

    5-2015के ias के रिजल्ट घोषित होने के साथ123ओबीसी के प्रतियोगियों की सफल होने के बाद भी, क्रीमीलेयर के आधार पर नियुक्ति में रोक लगाई गई(जबकि वित्तीय/बैंक संस्थान/पब्लिक सेक्टर यूनिट के अधिकारी क्रीमीलेयर के दायरे में नहीं आते थे) निम्नलिखित प्रतियोगी भी इन्हीं सस्थानों से सम्बंधित थे ,उसके बाद भी इन्हें नियुक्ति रोका गया था,"सेवा" के संसदीय प्रयास असफल होने के बाद ,"सेवा"इन 123ओबीसी iasअधिकारियों के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, "सेवा" का प्रयास सफल हुआ।

    6-देश मे सामाजिक/राजनैतिक साजिश के तहत ओबीसी की पांच उपजातियों को (यादव, कुर्मी, कोइरी/सैनी, गुजर, लोध)ओबीसी से निकालने के लिए सुप्रीम कोर्ट की याचिका को 30जून2016 को "सेवा" द्वारा खारिज कराया।

    7-देश मे फिर सामाजिक /राजनैतिक सडयंत्र के तहत ओबीसी को विखंडित करने मकसद से 2017 "पिछड़ा वर्ग वर्गीकरण आयोग" का गठन किया गया, जिसकी कार्यवाही को "सेवा" द्वारा न्यायिक काउंटर के माध्यम से निष्प्रभावी कर ओबीसी को विखंडन की कार्यवाही से रोका।

    8-देश मे बहुसंख्यक आबादी ओबीसी के सामाजिक, संवैधानिक, सैद्धांतिक संरक्षण हेतु "राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग" (27वर्षों सेअधिकार विहीन था)"सेवा"के निरंतर प्रयास से 2018में संवैधानिक/न्यायिक अधिकार प्राप्त "आयोग" बना।

    9-पुनःउत्तर प्रदेश में ओबीसी की उपजाति "यादव" को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ओबीसी से बाहर निकालने की प्रक्रिया में "सेवा" द्वारा 12जुलाई2019को न्यायिक काउंटर प्रस्तुत कर याचिका खारिज कराई।

    10-देश सबसे बड़ी घटनाओं में "एक" जनवरी2019में असंवैधानिक रूप संविधान में परिवर्तन कर 10%सवर्ण आरक्षण लागू किया गया, जिसको चैलेंज करते हुए, उसके खिलाफ "सेवा" ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसका निर्णय13अगस्त2019से रिजर्व है ,निर्णय "सेवा" के पक्ष में आने की प्रबल संभावना है।

    11-देश मे ओबीसी आरक्षण लागू हुआ ,तो शिक्षा में आरक्षण प्रथम चरण में लागू किये जाने का प्रचार प्रसार बहुत हुआ, लेकिन देश में
    निजी क्षेत्र की शिक्षा (पब्लिक स्कूल) के अनुरूप, भारत सरकार के अंतर्गत उच्चकोटि की शिक्षा के लिए चर्चित केंद्रीय विद्यालय एवम नवोदय विद्यालय, ओबीसी आरक्षण लागू होने से पूर्व से देश में संचालित थे,उनमे वर्ष 2019 तक ओबीसी छात्रों के लिए प्रवेश में आरक्षण प्राप्त नहीं था ,सिर्फ sc st के आरक्षण तथा शेष सवर्ण छात्रों होते थे, कुछ प्रवेश मा सांसदों की सिफारिश से होते थे, वह भी सिफारिशें सवर्ण छात्रों के पक्ष में होती थी, देश में निम्नलिखित विद्यालयों में लगभग12लाख छात्र अध्ययनरत होते है "सेवा" के अथक प्रयासों से दिसंबर2019में भारत सरकार द्वारा उक्त विद्यालयों में ओबीसी छात्रों को भी वर्ष2020से 27%आरक्षण देने का निर्णय किया।देश में लगभग 12लाख छात्र संख्या के अनुसार27%ओबीसी छात्रों को प्रवेश में लाभ मिल सकेगा।
    "सेवा"के विचार के अनुसार शिक्षा एवम संख्या के लिहाज से ओबीसी आरक्षण की सबसे बड़ी उपलब्धी है,पिछड़े वर्ग के छात्रों को प्राप्त होगी,यह "सेवा" के "मंडलवादी" विचार की सबसे बड़ी उपलब्धी मानी जायेगी।
    12-उत्तर प्रदेश में ओबीसी के छात्रों को ias/pcs परीक्षाओं हेतु विशिष्ट कोचिंग हेतु समाजकल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित सेंटर/वित्तीय सहायता के लिए पिछड़ा वर्गआरक्षण अधिनियम के अनुसार ओबीसी को 27%आरक्षण 04/05/2020 जारी कराया।

    13-भारत सरकार द्वारा "सेवा" को जनवरी2020के पत्र के अनुसार देश में मेडिकल शिक्षा में नीट के माध्यम से15%केंद्रीय सीटों के आवंटन तथा उच्च शिक्षा में पूर्ण प्रतिनिधित्व की दिशा में ओबीसी को27%आरक्षण मिलने के लिए जल्दी आदेश होने की प्रबल संभावना का है ।

    14-"सेवा" के माध्यम से देश/प्रदेशों में आपसी संवाद से ओबीसी के पक्ष में हजारों लोगों को सहयोग प्रदान किया जाना ,मंडलवादी विचार की स्थापना में अपने आप मे अदभुत शक्ति का सृजन होने का अनुभव प्रतीत होता है, यही अदभुत शक्ति ओबीसी को जाति ,समाज, धर्म,क्षेत्र के नाम हो रहे अन्याय को निष्प्राण तथा ओबीसी को संगठित करने की महाशक्ति प्राप्त होगी,तथा "मंडलवादी अवधारणा" को स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होंगी।

    15-"सेवा"ओबीसी के पक्ष में भारत सरकार/प्रदेश सरकारों एवम विभिन्न माध्यमों से ओबीसी के साथ हो रहे अन्याय पूर्ण कृत्य के खिलाफ एवम आपके संवैधानिकअधिकारों के पक्ष में निरन्तर प्रयासरत है।

    आप सभी से विन्रमता पूर्वक अनुरोध है कि निम्नलिखित उपलब्धियों को "सेवा" के समस्त साथियों /परिवार/रिस्तेदारों/ओबीसी के साथियों तक पहुँचाने का प्रयास जारी रखे ।धन्यवाद
    जय मंडल जय सेवा
    डॉ एम आर यादव रा अध्यक्ष सेवा