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सेवा क्या है ?

सेवा शब्द के उच्चारण से स यह ध्वनित होता है कि स्वयं के श्रम या त्याग से दूसरे को सुविधा/सहयोग प्रदान करना। सेवा का मूल तत्व यह है कि सेवा के सदस्यों को अपने श्रम और त्याग द्वारा स्वबन्धुओं और अपने मूल समाज के सहयोग और विकास के लिये तत्पर रहना है। सेवा अंगेजी के चार अक्षरों को मिलाकर बनाया गया शब्द है – Ssocialist, E-employee, W-welfare, A-association (SEWA) अर्थात समाजवादी कर्मचारी कल्याण संघ जो समस्त देश/प्रदेश में नियुक्त केन्द्रीय/राज्य सरकारी/ अर्द्धसरकारी,निगम,निजी संस्थान अथवा प्राइवेट सेक्टर में सेवारत् / सेवानिवृत्त कर्मचारियों/अधिकारियों का मानवीय मूल्यों को स्थापित करने को स्थापित समाज सेवा को संकल्पित एक गैर राजनैतिक गतिविधि/प्रकल्प/मिशन है। चूंकि सेवा पूरी तरह से गैर राजनैतिक गतिविधि है अतः किसी भी राजनैतिक दल का कोई भी पदाधिकारी सेवा की प्राथमिक सदस्यता के लिये अर्ह नहीं है। इस प्रकार सेवा समस्त प्रदेश/देश में नियुक्त केन्द्रीय/राज्य सरकारी/अर्द्धसरकारी, निगम, निजी संस्थान अथवा प्राइवेट सेक्टर में सेवारत् / सेवानिवृत्त कर्मचारियों/ अधिकारियों का एक ऐसा समन्वय है जहाँ सब अपने पदो के अधिकारों की शक्ति को एक मंच पर लाकर महाशक्ति का स्वरूप देकर उन्नत एवं आदर्श समाज के स्वप्न को साकार करने के मिशन के मशाल वाहक होने का गौरव हासिल करते हैं।

जय मंडल जय सेवा जय भारत। 22/05/2020 अतिमहत्वपूर्ण/अवश्य पढ़ें एवम आत्मचिंतन करें। सेवा के सभी सम्मानित साथियों विषय:-वर्गवादी सामाजिक एवम वैचारिक, अवधारणा का स्वरूप:- (मनुवाद(सवर्णवाद) अम्बेडकरवाद(दलितवाद) मंडलवाद (पिछड़ा वर्गवाद) यह मेरा निजी राय/व्यक्तिगत अनुभव से लिख रहा हूँ किसी व्यक्ति/समाज/वर्ग/संगठन/दल की भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा मकसद नहीं ,अगर किसी को मेरे विचार से असहमति हो तो मैं उनका क्षमा प्रार्थी हूँ। लेकिन अगर इस विचार से सहमत है तो ओबीसी समाज तक पहुँचाने का प्रयास जारी रखें जिससे पिछड़े वर्ग के हित में मंडलवाद स्थापित किये जाने की प्रक्रिया में सहायक सिद्ध हो सकें। ---–----–-----------/------------- मैं कोई इतिहासकार नही हूँ लेकिन समय के साथ आप सभी से सीखने का प्रयास करते हुए अपने अनुभव प्रेषित कर रहा हूँ। दुनिया में मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ मानवीय विकृतियों का जन्म भी हुआ तथा मनाव विचार शीलता का भी सृजन हुआ,विचारशीलता के द्वारा सकारात्मक/नकारात्मक दोनों ही शक्तियों ने मानवीय प्रवृत्ति में स्थाई रूप धारण कर लिया। मानवीय सामाजिक व्यवस्था की स्थापना के साथ साथ बंश परम्परा,राज्य परम्परा, एक दूसरे पर आधिपत्य की परम्परा ने स्थाई स्वरूप ले लिया, राज्य परम्परा ने .

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1477

आजीवन सदस्य (उत्तर प्रदेश )
17

अन्य राज्यों मे कुल आजीवन सदस्य
07

विधि प्रकोष्ठ में कुल आजीवन सदस्यों की संख्या
1494

सेवा में कुल आजीवन सदस्यों की संख्या
पूर्व में प्रदर्शित जानकारी सिस्टम जेनरेटेड थी जो कि राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय के संज्ञान में नहीं थी । अतःकृपया राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय द्वारा उपलब्ध करायी गई दिनांक 27 अगस्त 2023 तक की जानकारी से अवगत होने। का कष्ट करें ।
  • सेवा के विवरण

    सेवा के विवरण

    सेवा क्या है ....

    सेवा एक गैर राजनैतिक सामाजिक संस्था है ,

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    राष्ट्रीय कार्यकारणी का विवरण

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    प्रांतीय कार्यकारणी का विवरण

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    साहित्य प्रकोष्ठ का विवरण

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    विधि प्रकोष्ठ का विवरण .......

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    सभोदर/सामाजिक सेवा प्रकोष्ठ

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    सेवा की गतविधिया

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    जय मंडल जय सेवा जय भारत। 2  2/05/2020 अतिमहत्वपूर्ण/अवश्य पढ़ें एवम आत्मचिंतन करें। सेवा के सभी सम्मानित साथियों विषय:-वर्गवादी सामाजिक एवम वैचारिक, अवधारणा का स्वरूप:- (मनुवाद(सवर्णवाद) अम्बेडकरवाद(दलितवाद) मंडलवाद (पिछड़ा वर्गवाद) यह मेरा निजी राय/व्यक्तिगत अनुभव से लिख रहा हूँ किसी व्यक्ति/समाज/वर्ग/संगठन/दल की भावनाओं को ठेस पहुंचाना मेरा मकसद नहीं ,अगर किसी>

    कोई इतिहासकार नही हूँ लमैं िन समय के साथ आप सभी से सीखने का प्रयास करते हुए अपने अनुभव प्रेषित कर रहा हूँ। दुनिया में मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ मानवीय विकृतियों का जन्म भी हुआ तथा मनाव विचार शीलता का भी सृजन

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